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म्यांमार आर्मी के दो सैनिकों ने रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार और बलात्कार की बात क़ुबूल की

दो सैनिकों ने अपनी पहचान मायो विन तुन और जॉ नैंग तुन के रूप में उजागर की है. मायो विन तुन ने रोहिंग्या महिला, पुरुष और बच्चों की हत्याओं के साथ बलात्कार की बात कबूली है वहीं जॉ नेंग तुन ने हत्याओं के अलावा सामूहिक कब्रों में लाशों को दफनाने व दूसरे अपराधों की बात भी स्वीकार की है.

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स्टाफ रिपोर्टर | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली, 10 सितंबर | म्यांमार के दो पूर्व सैनिकों ने 2017 में हुए नरसंहार अभियान में मुसलमानों के सामूहिक नरसंहार और बलात्कार की घटनाओं में सैनिकों की भागीदारी की बात कबूली है.

म्यांमार से भागकर गए दोनों सैनिकों को सोमवार को हेग ले जाया गया. यहां इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में इस केस की जांच की गई कि क्या टाटमाड के नेता रोहिंग्याओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर नरसंहार और अपराधिक अभियान चला रहे हैं. वहीं म्यांमार सरकार ने रोहिंग्याओं के खिलाफ किसी भी तरह के अपराधिक अभियान का खंडन किया है.

दो सैनिकों ने अपनी पहचान मायो विन तुन और जॉ नैंग तुन के रूप में उजागर की है. जहां मायो विन तुन ने रोहिंग्या महिला, पुरुष और बच्चों की हत्याओं के साथ  बलात्कार की बात कबूली है वहीं जॉ नेंग तुन ने हत्याओं के अलावा सामूहिक कब्रों में लाशों को दफनाने व दूसरे अपराधों की बात भी स्वीकार की है.

सैनिक निंग ने कहा कि हमने करीब 20 गांवों का सफाया कर दिया और शवों को एक बड़ी कब्र में डंप कर दिया. दोनों सैनिकों की गवाही के वीडियो को इंटरनेशनल प्रॉसिक्यूटर्स के साथ साझा किया गया. ये पहली बार है जब म्यांमार के सेना के रूप में टाटमाड के सदस्यों ने रोहिंग्या के खिलाफ नरसंहार अभियान का हिस्सा होने के बारे में खुलकर बात की है.

इन सैनिकों के कुबूलनामे को अरकान आर्मी नामक एक समूह द्वारा फिल्माया गया है जो फिलहाल रखीन राज्य में म्यांमार आर्मी के साथ एक सशस्त्र संघर्ष में व्यस्त है और इसे   www.trtworld.com द्वारा पोस्ट किया गया.

वीडियो में सैनिक अपनी स्थानीय भाषा में बोल रहे हैं जिसका अनुवाद अंग्रेज़ी में किया गया है. वो वीडियो में कह रहे हैं कि उनके कमांडिंग ऑफिसर द्वारा आदेश दिया गया था कि  रोहिंग्या मुसलमानों के गावों में “जैसे ही कोई दिखाई या सुनाई दे उसे गोली मार देनी है.”

भागे हुए सैनिक बताते हैं कि “मोक-15 के सेकंड इन कमांड ऑफिसर कर्नल थान हटाइक ने हमें आदेश दिया था कि “तुम्हें जो भी दिखाई या सुनाई दे सबको गोली मार दो.”

उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों के जनसंहार और बलात्कार में शामिल होने और उनकी लाशों को सामूहिक रूप से दफनाने की बात भी स्वीकारी है.

इसलिए जब हमने कलार गांव में क्लीयरेंस ऑपरेशन चलाया तो तौंग बाज़ार गांव में पहुंचे सभी लोगों पर अंधाधून गोलियां चलाई. सैनिक आगे बताते हैं कि “बच्चों और बड़ों का ख़्याल किए बिना गोलियां चलाईं.”

सैनिक आगे स्वीकारते हैं कि, “हमने जो भी दिखाई या सुनाई दे” इस आधार पर क्लियरेंस ऑपरेशन चलाया और टॉवर ताई स्ट्रीट में एक कब्र में 30 लाशों को दफनाया.”

सैनिकों ने अल्पसंख्यकों पर हिंसा की बात कबूल की है. उन्होंने कहा कि वे अपने परिवार को आर्थिक मदद देने का वादा किए जाने के बाद सेना में शामिल हुए थे. सेना से भागे हुए एक अधिकारी ने कहा, “मैं अपने पिता और माँ को मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित होने में मदद देने का वादा किए जाने के बाद बर्मी सेना में शामिल हो गया.”

उन्होंने कहा कि सेना के द्वारा उनके साथ किए गए वादे नहीं निभाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने के बाद वे वहां से भाग गए. सेना ने उन्हें बताया कि जातीय सशस्त्र समूह आतंकवादी हैं. उन्होंने कहा, “मैं भी करेन से एक जातीय अल्पसंख्यक हूं. बर्मी सेना में अन्य जातीय लोगों का भी उनके (सेना) द्वारा उत्पीड़न किया गया था.

न्याय के लिए चल रहे संघर्ष में दोनों भागे हुए सैनिकों का कबूलनामा रोहिंग्‍या के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है.

एक मानवाधिकार समूह फोर्टिफ़ राइट्स ने कहा है कि, “यह म्यांमार सेना के अंदरूनी सूत्रों से पहला सार्वजनिक कबूलनामा है जो अनिवार्य रूप से नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों को दर्शाता है.”

 फोर्टिफाइ राइट्स के सीईओ मैथ्यू स्मिथ ने कहा, “यह इस मामले में एक महत्वपूर्ण क्षण है.”

स्मिथ ने एक बयान में कहा, “ठीक है, हमारे लिए, इन बयानों से पता चलता है कि हमने जो कुछ भी जाना है, वह यह है कि म्यांमार की सेना रोहिंग्या को नष्ट करने के इरादे से थी. वरिष्ठ कमांडरों ने निचले स्तर के सैनिकों को नरसंहार के आदेश देने और रोहिंग्या लोगों को मारने का आदेश दे रहे थे.”

अगस्त 2017 के बाद से 700,000 से अधिक रोहिंग्या, सेना द्वारा हिंसक अभियान के बाद म्यांमार से पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश भागने पर मजबूर हुए जिस हिंसा को यूएन ने ‘जातीय नरसंहार का टेक्स्टबुक उदाहरण’ कहा है. साथ ही 300 से अधिक रोहिंग्या शरण लेने के लिए दो दिन पहले इंडोनेशिया के तट पर पहुंचे थे.

हालांकि, म्यांमार सरकार ने बार-बार नरसंहार से इनकार किया है, यह कहते हुए कि 2017 में अपने सैन्य अभियानों ने सीमावर्ती सैन्य चौकियों पर हमला करने वाले रोहिंग्या आतंकवादियों को निशाना बनाया.

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