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बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में प्रवेश परीक्षा कराने के विरोध में एम.ए. के छात्र का सत्याग्रह, 8 दिनों से धरने पर

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बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में प्रवेश परीक्षा कराने के विरोध में एम.ए. के छात्र का सत्याग्रह, 8 दिनों से धरने पर
BHU में सत्याग्रह कर रहा छात्र

अज़हर अंसार  | इंडिया टुमारो

लखनऊ, 20 अगस्त | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस के काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षाओं को लेकर छात्रों का विरोध चल रहा है. एम.ए. हिंदी का छात्र नीरज कुमार पिछले 8 दिनों से प्रवेश परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ छात्र संघ भवन के बाहर सत्याग्रह कर रहा है.  

सोशल मीडिया पर भी छात्र व विभिन्न छात्र संगठन देश में लगातार बढ़ते कोविड-19 के संक्रमण का हवाला देकर प्रवेश परीक्षाएं टालने की मांग कर रहे हैं जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश परीक्षाएं कराने के अपने निर्णय से पीछे हटने को तैयार नहीं है.

विश्वविद्यालय द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवेश परीक्षा कराने के विरोध में एक छात्र नीरज कुमार विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों की जान से खिलवाड़ करने और छात्रों की बातें न सुनने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा है। नीरज एम.ए. हिंदी के छात्र हैं और 13 अगस्त से छात्र संघ भवन के बाहर सत्याग्रह पर बैठे हैं. वें अपनी मांगों को लेकर बीएचयू के कुलपति और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं.

नीरज का कहना है, “महामारी के दौरान सभी प्रकार की परीक्षाएं स्थगित की जाए। आज देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 28 लाख के पार हो गई है और 53 हज़ार से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके हैं. रोजाना 60 से 70 हज़ार के बीच नए केस आ रहें हैं. ऐसे में विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा या किसी भी प्रकार की परीक्षाएं करवाना, जिसमें लाखों परीक्षार्थी शामिल होंगे, बहुत जोखिम भरा है.”

सत्याग्रह कर रहे छात्र का ये भी कहना है कि बीएचयू की प्रवेश परीक्षाओं समेत जेईई व नीट की परीक्षाएं भी आगामी कई महीनों के लिए टाल दी जानी चाहिए.

नीरज कहतें हैं कि न केवल देश इस समय कोविड-19 से जूझ रहा है बल्कि देश के कई हिस्सों में बाढ़ भी बड़ी समस्या बनी हुई है. बीएचयू में प्रतिवर्ष बिहार, बंगाल और असम के छात्र भी प्रवेश लेते हैं और इस समय इन राज्यों में बाढ़ के कारण जन जीवन असामान्य है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के भी कुछ जिलों में बाढ़ जैसे हालात हो चुके हैं ऐसे में कोई छात्र जो बीएचयू में प्रवेश लेना चाहता है उसके लिए एग्जाम सेंटर तक पहुंचना मुश्किल है.

नीरज को सत्याग्रह करते हुए अबतक 8 दिन बीत चुके हैं. न तो इन्हें अभी तक वाइस चांसलर से मिलने दिया गया है और ना ही कोई प्रशासनिक अधिकारी इनसे मिलने आया है. नीरज अपनी मांगों को लेकर अब तक बंगाल और बिहार समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रीयों और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र भी लिख चुके हैं.

आज उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बीएचयू की प्रवेश परीक्षा के लिए सभी सेंटर्स पर महामारी से बचने की व्यवस्था करने और ऐसा न होने कि स्थिति में परीक्षा स्थगित करने की मांग की है. नीरज ने अपने पत्र में लिखा; “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते मैं आपको इस पत्र के माध्यम से ये अपील करना चाहता हूं कि परीक्षार्थियों की समस्याओं को देखते हुए प्रदेश में किसी भी प्रकार की कोई परीक्षा आयोजित न की जाए साथ ही आपसे यह उम्मीद है कि आप बीएचयू प्रशासन से परीक्षा न कराने की बात करेंगे.”

18 अगस्त को विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश परीक्षाओं का शेड्यूल जारी किया गया है. इसके अनुसार 24 अगस्त से प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हो रही है. इसमें 24 से 31 अगस्त तक पहला और 9 सितंबर से 18 सितंबर तक दूसरे चरण में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जानी है.

बीएचयू के दर्जनों ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज की 12 हज़ार से ज्यादा सीटों के लिए देशभर से लगभग सवा 5 लाख छात्रों ने आवेदन किया हुआ है. बीएचयू के छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति से मिलकर बात करने की कई कोशिशें की लेकिन वाइंस चांसलर छात्रों से नहीं मिले और ना ही कोई प्रशासनिक अधिकारी छात्रों से मिला है.

एम.ए. पोलिटिकल साइंस के छात्र व छात्र संगठन आइसा की बीएचयू इकाई के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह कहते हैं कि “जब कोई भी विश्वविद्यालय इस महामारी के दौरान किसी भी तरह की परीक्षाएं नहीं करा रहा है तो बीएचयू ये खानापूर्ति क्यों कर रहा है. ये फैसला उन क्षत्रों से आने वाले लोगों के भी खिलाफ हैं जहाँ इस समय बाढ़ आई हुई है.”

विवेक कहते हैं कि ये फैसला एक तरह से कमज़ोर गरीब लोगों के खिलाफ भी एक साजिश है क्योंकि जिसके पास अपना साधन नहीं है वो कैसे एग्जाम सेंटर तक पहुँच पाएगा? इस फैसले से बीएचयू केवल सुविधा-संपन्न लोगों का कम्पटीशन घटना चाहता है!”

बीएचयू के कई छात्र और पूर्व छात्र भी विश्वविद्यालय के इस निर्णय के खिलाफ सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं. एक छात्र प्रियेश पांडे ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा; “…ये साफ है कि सरकार और उसके सभी संस्थान लाखों विद्यार्थियों के स्वास्थ् व उनके जीवन की चिंता करने के बजाए प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करा के यह सन्देश देना चाहते हैं कि कोरोना महामारी अब निष्क्रिय हो रही है और सब कुछ सामान्य हो रहा है जबकि महामारी हर दिन पिछले दिन का रिकॉर्ड तोड़ती जा रही है और इस वक़्त हिंदुस्तान में दुनिया में प्रतिदिन सबसे ज़्यादा मामले आ रहे हैं और इसी हफ्ते ये संख्या 30 लाख तक पहुँच जाएगी…”

विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा कराने के फैसले के खिलाफ जारी छात्रों के इस विरोध के सम्बन्ध में जब हमने विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष जानने के लिए बीएच यू के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह को संपर्क किया तो उन्होंने पहली बार कॉल तो रिसीव की लेकिन सवाल करने पर इस सम्बन्ध में कोई बात करने से इंकार करते हुए फ़ोन काट दिया.

कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण और बाढ़ के आलावा भी कुछ और समस्याएँ हैं जिनके कारण छात्र प्रवेश परीक्षा के केंद्र तक पहुँचने में परेशानियों का सामना कर सकते हैं. कई राज्यों में लॉकडाउन को सितम्बर के पहले और कुछ राज्यों में दुसरे हफ्ते तक बढ़ाया गया है. कुछ राज्यों में अभी भी ट्रेन – बसें या यातायात सुविधाएँ सुचारू रूप से शुरू नहीं हुई है. ऐसे में बीएचयू प्रशासन का अगस्त-सितम्बर के महीनों में प्रवेश परीक्षा कराने का फैसला मनमाना और बेतुका नज़र आता है.

ये भी गौरतलब है कि पिछले दिनों 9 अगस्त को यूपी बीएड और 16 अगस्त को खण्ड शिक्षा अधिकारी की परीक्षाएं आयोजित की गई थी. इन परीक्षाओं में बुनियादी सुविधाओं और सतर्कता के नियमों जैसे सोशल डिस्टेंसिंग, थर्मल स्क्रीनिंग व संक्रमण रोकने के अन्य उपायों की कोई व्यवस्था नहीं थी. कई न्यूज़ पोर्टल्स ने इस अव्यवस्था को दिखाया भी था. इन परीक्षाओं में क्रमश: 13% व 44% परीक्षार्थी अनुपस्थित थे. इस अनुपस्थिति का कारण भी आप समझ सकते हैं.

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