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सोमवार, जून 17, 2024
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बेंगलुरु हिंसा : NIA करेगी जांच, फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट ने पुलिस की लापरवाही को बताया ज़िम्मेदार

कुछ दिनों पूर्व बेंगलुरु हिंसा को लेकर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें हिंसा के लिए पुलिस द्वारा कार्रवाई में देरी को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

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मसीहुज़्ज़मा अंसारी | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली | बेंगलुरु हिंसा की जांच की कमान अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दी गयी है. मंगलवार को गृह मंत्रालय ने बेंगलुरु हिंसा के दो मामलों की जांच एनआईए द्वारा किए जाने का निर्देश दिया है.

हालाँकि कुछ दिनों पूर्व बेंगलुरु हिंसा को लेकर एक फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें हिंसा के लिए पुलिस द्वारा कार्रवाई में देरी को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

एनआईए के प्रवक्ता के अनुसार सोमवार को आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी ने आगजनी और हिंसा संबंधी 2 मामले दर्ज किए जो 11 अगस्त को बेंगलुरु सिटी के डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थानों की सीमाओं में हुई हिंसा के  सम्बंध में हैं.

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस ने आरोपियों पर कार्रवाई में देरी की जिसके कारण ये हिंसा हुई. इस रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर एक अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ़ की गई शिकायत और इसके बाद पुलिस द्वारा देरी से कार्यवाही करने के कारण बैंगलुरू हिंसा में भड़की.

ज्ञात हो कि बेंगलुरु शहर के कवलबीरेसेंड्रा इलाके में 11 अगस्त को कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर के सामने भीड़ हिंसक हो गई. कांग्रेस विधायक के भतीजे द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट के बाद मुसलामानों ने विरोध करना शुरू किया.

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक पर एक अपमानजनक पोस्ट के खिलाफ़ की गई शिकायत और इसके बाद हुई प्रतिक्रिया पर देरी से कार्यवाही करने के कारण बैंगलुरू में हिंसा में भड़की.

हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज जस्टिस नागा मोहन दास और 11 संगठनों के सहयोग से फैक्ट फाइंडिंग टीम ने रिपोर्ट तैयार की जिसे पिछले हफ्ते एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया गया और इसे ब्रीफ किया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, घटना कि रात को मुस्लिम समुदाय के दो प्रतिनिधिमंल पूर्वी बैंगलुरू के डीजे हाली और केजी हाली पुलिस स्टेशनों में पहुंचे थे. घटना वाले दिन 5:30 बजे प्रतिनिधि मंडल पी. नवीन कुमार के फेसबुक पेज पर उसके द्वारा मोहम्मद साहब पर पोस्ट की गई अपमानजनक तस्वीरों के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाना चाहते थे. उस पर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया.

रिपोर्ट बताती है कि पुलिस न सिर्फ नवीन के ख़िलाफ़ शिकायत पर कार्यवाही करने में विफल हुई बल्कि कवल बिरासंद्रा जहां विधायक व नवीन के घर हैं वहां भी हिंसा व आगजनी को रोकने में पुलिस नाकाम रही.

नवीन के परिवार के मुताबिक पुलिस ने उनके फोन का कोई जवाब नहीं दिया और जब हिंसा शुरू हुई तो तीन पुलिस वाले जो आये थे वो फौरन लौट गए. इसके बाद भीड़ ने विधायक के घर हमला कर दिया लेकिन पुलिस द्वारा देर रात 1:30 बजे हालात को काबू में किया गया.

कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन अब्दुल अज़ीम के अनुसार भी डीजे हाली में पुलिस द्वारा कार्यवाही में देरी के कारण उपजे गुस्से ने हिंसा भड़काई.

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