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हॉफ एनकाउंटर का गढ़ तो नहीं बन रहा आज़मगढ़?

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मसीहुज़्ज़मा अंसारी | इंडिया टुमारो

लखनऊ, 14 अगस्त | आज़मगढ़ में सरॉयमीर के शिवाला क्षेत्र के अजय यादव और इन जैसे बहुत से लोग हाफ एनकाउंटर में पुलिस की गोली के शिकार हैं और अपने इलाज व आए दिन पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण परेशान हैं.

पुलिस इन एनकाउंटर को मुठभेड़ बताती रही है लेकिन पीड़ितों के घर वाले इससे इनकार करते रहे हैं.

अजय के मामले में पीड़ित परिवार का ये आरोप है कि अक्सर पुलिस इन्हें घर से थाने उठा ले जाती है जिसके कारण इनका पूरा परिवार त्रस्त है.

इंडिया टुमारो से बात करते हुए पीड़ित अजय यादव ने बताया कि, “मई 2018 को मैं बाइक से कहीं जा रहा था तभी अचानक पुलिस ने मुझे रोका और थाने ले गई. थाने में मेरा हाथ पैर बाँध दिया और आँख पर पट्टी बाँध दी गयी.”

अजय ने आगे बताया कि, “थोड़ी देर बाद एसओजी के लोग आए और मुझे सूमो में बैठाकर एक सुनसान स्थान पर ले गए. मेरा हाथ खोल दिया गया और थोड़ी देर बाद मेरे घुटने पर दो गोली मारी गयी.”

ज्ञात हो कि आज़मगढ़ में पिछले 3 सालों में 9 लोग पुलिस एनकाउंटर में मारे गए हैं. जबकि दर्जनों ऐसे केस हैं जिनके पैरों में गोली मारी गई है.

आज़मगढ़ में एस० पी० अजय साहनी के कार्यकाल में सबसे अधिक एनकाउंटर हुआ है.

हॉफ एनकाउंटर के शिकार जिनके पैरों में गोली मारकर छोड़ दिया गया है उनमें दलित मुस्लिम और ओबीसी सबसे अधिक हैं. जबकि एनकाउंटर में मारे जाने वालों में दलित और ओबीसी हैं.

रिहाई मंच के राजीव यादव इंडिया टुमारो से बात करते हुए कहते हैं, “उत्तर प्रदेश में योगी सरकार में अब तक 1800 से अधिक ‘हॉफ एनकाउंटर’ हो चुके हैं. अधिकतर को पैर में घुटने से नीचे गोली मारी गई है.”

इससे पहले भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुठभेड़ के नाम पर सिर्फ कानपुर में 15 अक्तूबर 2018 से 14 जनवरी तक 31 को गोली मारी गयी थी. इनमें 22 बदमाशों के दाएं और नौ के बाएं पैर में घुटने के नीचे गोली मारी गयी थी. रिपोर्ट के अनुसार एक भी बदमाश की हड्डी में गोली नहीं लगी जिसे लेकर भी पुलिस के इस एनकाउंटर पर संदेह और सवाल होते रहे हैं.

इंडिया टुमारो से बात करते हुए पीड़ित अजय के पिता सत्यराम यादव ने बताया कि, “अजय को पुलिस ने दो साल पहले पैर में गोली मारी थी. अब तक हम इसका इलाज करा रहे हैं. हम गरीब हैं और हमारे पास इलाज के पैसे भी नहीं हैं. मेरा बेटा ठीक से चल भी नहीं पाता मगर अब भी पुलिस मेरे बेटे को उठा ले जाती है.”

पुलिस पर सवाल उठाते हुए सत्यराम ने कहा, “मेरा बेटा बेक़सूर है. पुलिस वाले मेरे बेटे को उठाकर ले गये और एक घंटे बाद पैर में गोली मार दी. इसे मुठभेड़ बताया जा रहा है जबकि ये बात ग़लत है. मेरे बेटे को सबके सामने उठाया गया था.”

उन्होंने कहा, “हमारा परिवार डर में जी रहा है. कभी भी पुलिस वाले मेरे बेटे को उठा ले जा रहे हैं.”

पीड़ित अजय की माँ ने इंडिया टुमारो से बात करते हुए कहा, “मेरा बेटा अब कोई भी काम करने लायक नहीं रहा और घर पर रहने पर पुलिस अकसर उठा ले जाती है. न तो कमाई है और न घर चलाने का ठिकाना. हम लोग बहुत परेशान हैं.”

आज़मगढ़ में हो रहे इन एनकाउंटर पर रिहाई मंच के राजीव यादव कहते हैं, “योगी सरकार में पूरे उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर का जो सिलसिला शुरू हुआ है वो थमने का नाम नहीं ले रहा है. सारे एनकाउंटर की पटकथा भी एक सी ही है. सभी मुठभेड़ में पुलिस एक ही तरह से गोली मारती है.”

उन्होंने अजय यादव के बारे में बात करते हुए कहा कि, “अजय के हॉफ एनकाउंटर की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की गयी है जिसपर आयोग ने उत्तर प्रदेश के सचिव को इस संबंध में कार्रवाई का आदेश दिया था. हालांकि अब तक कोई कर्रवाई नहीं हुई है.”

राजीव बताते हैं कि, “पुलिस सभी का एनकाउंटर पैर में एक ही स्थान पर गोली मारकर करती है. इन एनकाउंटर को सही साबित करने और दूर से गोली मारे जाने को साबित करने के लिए पीड़ित के पैर में भीगा बोरा बांध देती है कि बारूद के निशान न रहे और मुठभेड़ साबित हो सके.”

उन्होंने कहा, “योगी सरकार की पुलिस दलित ओबीसी के युवाओं को घुटने में गोली मारकर मनुवादी सोच को दर्शाती है कि हम तुम्हें घुटने के बल चलाएंगे.”

एनकाउंटर से सम्बंधित मामलों में जांच के लिए जो मांग की गयी है उनमें कहीं भी कार्रवाई अब तक पूरी नहीं हो सकी है.

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