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दिल्ली दंगा: आरोपपत्र में येचुरी और योगेंद्र यादव सहित कई बड़े नाम भी शामिल, साज़िश का आरोप

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स्टाफ रिपोर्टर | इंडिया टुमारो

नई दिल्ली, 13 सितंबर | उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगे में पुलिस ने एडिनशल चार्जशीट दायर की है जिसमें कई बड़े नाम भी शामिल हैं.

दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और अन्य प्रमुख लोगों के नाम सामने आए हैं.

दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपी छात्राओं के बयान को आधार बनाकर येचुरी, योगेंद्र यादव और अपूर्वानंद समेत सभी के नाम चार्जशीट में दाखिल किए गए हैं. पुलिस ने चार्जशीट में गंभीर आरोप लगाया है.  

रिपोर्ट के अनुसार मामले में आरोपी देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और गुलफिशा फातिमा द्वारा किए गए खुलासे एवं बयानों में प्रमुख हस्तियों का नाम लिया गया है. यह तीनों गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोपों का सामना कर रहे हैं.

क्या हैं छात्राओं के बयान

सीलमपुर में 15 जनवरी को हुए प्रदर्शन के बारे में फातिमा ने पुलिस के सामने खुलासा करते हुए कहा, “योजना के अनुसार भीड़ बढ़ने लगी थी. उमर खालिद, चंद्रशेखर रावण, योगेंद्र यादव, सीताराम येचुरी और वकील महमूद प्राचा सहित बड़े नेता और वकील इस भीड़ को भड़काने के लिए आगे आने लगे.”

चार्जशीट के अनुसार, “उन्होंने कहा, प्राचा ने कहा कि प्रदर्शन में बैठना आपका लोकतांत्रिक अधिकार है और बाकी नेताओं ने सीएए और एनआरसी को मुस्लिम विरोधी बताकर समुदाय में असंतोष की भावना को हवा दी.”

कलिता और नताशा नरवाल ने बयान में कहा कि उन्हें तीनों व्यक्तियों द्वारा सीएए और एनआरसी के खिलाफ विरोध किए जाने और किसी भी हद तक जाने के लिए कहा गया था.

योगेंद्र यादव की प्रतिक्रिया

योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा है, “आरोप पत्र में हमारा नाम अभियुक्त के तौर पर नहीं है बल्कि एक अभियुक्त के बयान के आधार पर शामिल किया गया है और यही सही है.”

उन्होंने ये भी दावा किया है कि उनके बारे में की गयी टिप्पणी में उनके भाषण का एक भी वाक्य नहीं है. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने मेरे भाषणों की रिकॉर्डिंग देखने की ज़हमत भी नहीं उठाई जो सार्वजनिक हैं.”

बड़े नाम भी हैं शामिल

अर्थशास्त्री जयंती घोष, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्वानंद और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर राहुल रॉय का नाम भी आरोपपत्र में शामिल है.

येचुरी का सरकार पर निशाना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी ने चार्जशीट में नाम आने के बाद मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के भड़काऊ वीडियो मौजूद हैं उनपर दिल्ली पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. ये पूरा मामला विपक्ष को निशाना बनाने का है.

मामले में नाम आने के बाद येचुरी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस भाजपा की केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के नीचे काम करती है। उसकी ये अवैध और ग़ैर-क़ानूनी हरकतें भाजपा के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के चरित्र को दर्शाती हैं। वो विपक्ष के सवालों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से डरते हैं, और सत्ता का दुरुपयोग कर हमें रोकना चाहते हैं.”

उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “यह मोदी सरकार न सिर्फ़ संसद में सवालों से डरती है, यह प्रेस कॉन्फ़्रेन्स करने से घबराती है और RTI का जवाब देने से – वो मोदी का निजी Fund हो या अपनी degree दिखाने की बात। इस सरकार की सभी असंवैधानिक नीतियों और असंवैधानिक क़दमों का विरोध जारी रहेगा.”

येचुरी ने ट्वीट कर असल आरोपियों की जांच की मांग करते हुए कहा, “56 लोग दिल्ली की हिंसा में मारे गए. ज़हरीले भाषणों का वीडियो है, उन पर कार्यवाई क्यों नहीं हो रही है? क्योंकि सरकार ने आदेश दिया है कि विपक्ष को लपेटा जाए, किसी भी तरह से. यही है मोदी और BJP का असली चेहरा, चरित्र, चाल और चिंतन। विरोध तो होगा इसका.

रिपोर्ट के अनुसार, “दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जनसंपर्क अधिकारी अनिल मित्तल ने कहा, ‘‘ये नाम सीएए विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन और उन्हें संबोधित करने के सिलसिले में एक आरोपी के खुलासा करने वाले बयान का हिस्सा हैं.”

ज्ञात हो कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों पर अचानक हुए हमले के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 200 से अधिक लोग घायल हुए थे.

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