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दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन टीवी के ‘साम्प्रदायिक’ शो पर लगाई रोक

कथित तौर पर, शो में दावा किया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता "मुसलमानों द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश" का प्रतिनिधित्व करती है.

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इंडिया टुमारो

नई दिली, 28 अगस्त | दिल्ली उच्च न्यायालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों द्वारा दायर एक याचिका पर सुदर्शन न्यूज चैनल के विवादित ट्रेलर के प्रसारण पर रोक लगा दी है.

याचिकाकर्ताओं ने सुदर्शन न्यूज पर “बिंदास बोल” नामक कार्यक्रम के प्रस्तावित प्रसारण को प्रतिबंधित करने की मांग की थी. ये कार्यक्रम शुक्रवार रात 8:00 बजे से प्रसारित होने वाला था.

दावा किया गया है कि यह कार्यक्रम सिविल सेवा में कथित रूप से “मुस्लिमों की घुसपैठ” पर आधारित था.

लाइव लॉ.इन के अनुसार, जस्टिस नवीन चावला की एकल पीठ ने तत्काल सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया है.

कार्यक्रम में कथित तौर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया, इसके पूर्व छात्रों और मु‌स्लिम कम्युनिटी के खिलाफ नफरत फैलाने, हमला करने और उकसाने वाली सामग्री शामिल है.

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने पत्रकार सुरेश चव्हाणके के शो का ट्रेलर देखा है, और यह आरोप लगाया है कि श्री चव्हाणके जामिया मिल्लिया इस्लामिया और मुस्लिम समुदाय के छात्रों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया है और मानहानि की है.

कथित तौर पर, शो में दावा किया गया है कि सिविल सेवा परीक्षा 2020 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों की सफलता “मुसलमानों द्वारा सिविल सेवा में घुसपैठ करने की साजिश” का प्रतिनिधित्व करती है.

यह आरोप लगाया गया है कि श्री चव्हाणके ने “खुलकर ल‌क्षित गैर-मुस्लिम दर्शकों को उकसाया है कि “जामिया मिल्ल‌िया इस्लामिया के जिहादी या आतंकवादी जल्द ही कलेक्टर और सेक्रेटरी जैसे शक्तिशाली पदों पर आसीन होंगे।”

लाइव ला के अनुसार, यह कहा गया है कि ट्रेलर के साथ प्रस्तावित प्रसारण केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रोग्राम कोड का उल्लंघन करता है, जिसे केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के साथ पढ़ा जाता है। प्रस्तावित प्रसारण और ट्रेलर में अभद्र भाषा और आपराधिक मानहानि भी होती है और यह भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (1), 153B (1), 295A और 499 के तहत अपराध है.

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