आज़मगढ़ में सामंती उत्पीड़न के शिकार दलित परिवार दहशत में

महेंद्र कुमार ने बताया कि, "जब भी हम सीओ साहब को कॉल करते हैं या मिलने जाते हैं तो उनका यही कहना होता है कि बस हम आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. दूसरी तरफ आरोपी अब भी निडर घूम रहे हैं और हमारे ऊपर कमेंट कर रहे हैं."

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मसीहुज़्ज़मा अंसारी | इंडिया टुमारो

आज़मगढ़ जनपद में सरॉयमीर के पास हाजीपुर गांव के एक दलित परिवार को पास के ही गांव के अन्य जाति के लोगों द्वारा बुरी तरह मारने का मामला सामने आया है. इस संबंध में पुलिस ने आरोपियों पर मामला तो दर्ज किया है लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है जिससे पीड़ित दलित परिवार दहशत में है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जिस समय भूमि पूजन की तैयारी में लगी हुई थी और रामराज्य के स्थापना की बात की जा रही थी ठीक उसी समय आज़मगढ़ में एक दलित परिवार हिंसक जातीय उत्पीड़न का गवाह बन रहा था. आरोप है कि सरॉयमीर के हाजीपुर गांव की दलित महिलाओं को भरौली गांव के दबंगों ने शौच करने जाने से रोका और फिर उन्हें जातिसूचक गालियां दी गईं.

इस घटना में पीड़ित पक्ष के सुरेंद्र प्रसाद उम्र 44, सुशीला देवी उम्र 40, प्रभावती देवी उम्र 65 और महेंद्र कुमार उम्र 40 वर्ष को गंभीर चोटें आई थीं इस मामले में एक महीना बीत जाने पर भी अब तक पीड़ित परिवार से जाँच अधिकारी (IO) ने बात भी नहीं की है. रिहाई मंच के राजीव यादव कहते हैं कि ये दलित परिवार पर जानलेवा हमले का मामला है मगर इस मामले को पुलिस ने पूरी तरह से डाइल्यूट किया है और एक महीने के बाद भी एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है. पीड़ित महेंद्र कुमार ने इंडिया टुमारो को घटना के बारे में बताते हुए कहा कि, “गांव की दलित महिलाओं को शौच करने जाने से रोका गया और फिर घर पर आकर महिलाओं को गालियां दी गईं, उन्हें धक्का दिया गया और मारा गया. जब बीच बचाव करने के लिए हम आगे आए तो हमें भी मारा गया और सर पर हमला कर मुझे ज़ख्मी कर दिया गया.” महेंद्र कुमार ने बताया कि, “आरोपियों ने मेरी माँ को मारा, मुझे घायल कर दिया, मेरे बूढ़े पिता को धक्का दिया और मारा, मेरी भाभी और भैया को भी मारा गया. ऐसा लगता था कि आरोपी जान लेने की नीयत से ही आए हैं.”

उन्होंने कहा, “इस मामले में बीच बचाव करने के लिए बबलू प्रधान आए लेकिन थोड़ी देर बाद दोबारा दबंगों ने हमला किया और हमें बुरी तरह घायल कर दिया. हम सभी परिवार के सदस्य लहूलुहान थे. हमें अस्पताल एडमिट होना पड़ा और सर में कई जगह टांके भी लगे.” पीड़ित पक्ष की 65 वर्षीय प्रभावती देवी ने रोते हुए इंडिया टुमारो से कहा कि, “हम लोग छोटी जाति के हैं, हमको बुरी तरह मारा गया है, हमें कहाँ इंसाफ मिलेगा?” ज्ञात हो कि ये घटना 9 जुलाई 2020 की है. उसी दिन आरोपियों पर एफआईआर भी दर्ज हुई. इस घटना में पीड़ित परिवार के 5 लोग बुरी तरह ज़ख्मी थे. इंडिया टुमारो से बात करते हुए पीड़ित परिवार ने कहा कि इस मामले में एक महीना बीत जाने पर भी आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है.

“जब भी हम सीओ साहब को कॉल करते हैं या मिलने जाते हैं तो उनका यही कहना होता है कि बस हम आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. दूसरी तरफ आरोपी अब भी निडर घूम रहे हैं और हमारे ऊपर कमेंट कर रहे हैं.”

पीड़ित पक्ष के महेंद्र कुमार ने बताया कि, “जब भी हम सीओ साहब को कॉल करते हैं या मिलने जाते हैं तो उनका यही कहना होता है कि बस हम आरोपियों को गिरफ्तार करने वाले हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. दूसरी तरफ आरोपी अब भी निडर घूम रहे हैं और हमारे ऊपर कमेंट कर रहे हैं.” पीड़ित परिवार आरोपियों से दहशत में है और उन्हें अपनी जान को लेकर भय बना हुआ है. उन्होंने ने इस बात की आशंका व्यक्त की है कि आरोपी उनपर फिर से हमला कर सकते हैं.

इंडिया टुमारो से बात करते हुए पीड़ित परिवार ने सरकार से ये मांग की है कि, “सरकार हमें न्याय दे, हमें सरकार सुरक्षा प्रदान करे क्योंकि हमें आरोपियों से ख़तरा है. वो कभी भी हमपर जानलेवा हमला कर सकते हैं.” रिहाई मंच राजीव यादव ने इस घटना के संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक कम्प्लेन भी किया है. राजीव यादव ने इंडिया टुमारो से कहा कि, “आज़मगढ़ इस समय सामंती उत्पीड़न का बड़ा केंद्र बनता हुआ नज़र आरहा है. यहां अपराधियों के नाम पर बहुत से एनकाउंटर हो रहे हैं. इसी सरॉयमीर में मास्क न पहनने पर पुलिस वाले लोगों को मार रहे हैं लेकिन यहीं पर एक दलित परिवार पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस एक महीने में कोई कार्रवाई नहीं कर सकी.”

राजीव ने आगे कहा कि, “सिकंदरपुर की घटना में दलित और मुसलमानों में किसी मामले को लेकर झगड़ा हो गया था जिसमें योगी जी ख़ुद गए और मुस्लिम आरोपियों पर रासुका लगाने की बात कही मगर सामंती उत्पीड़न के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है.” इस मामले में जाँच अधिकारी शंकर प्रसाद से इंडिया टुमारो ने बात की. उन्होंने पहले तो घटना की जानकारी से इंकार करते हुए कहा कि, “हुआ होगा कोई मामला मुझे इसके बारे में नहीं पता.” ये कहने पर कि एफआईआर में जांच अधिकारी में आप का नाम और नंबर दर्ज है, उन्होंने कहा, “हुई होगी जांच, मुझे इसकी कोई ख़बर नहीं है. डायरी साथ लेकर नहीं घूमता.” यह कहते हुए उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी


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